लोग न्यु इअर की मुबारक बात दे रहे रहे है।
पर हकीकत तो ये है के जीँदगी का एक और साल कम हो गया,
एक और साल आयेगा और वो भी युहीँ ना गुजर जाये इसीलीये पैसे से ज्यादा इमान पर तवज्जो दो, इमान मजबुत होगा तो आपसी रीश्ते मजबुत होँगे,
और आपसी रीश्ते मजबुत होँगे तो कौम ताखतवर होगी।
और कौम ताखतवर होगी तो हर एक परेशानी दुर हो जायेगी।
गया सो वक्त नही आता।
इसीलीये इमान को मजबुत करो।
जो वक्ता जाया गया उस पर अफसोस करो।
और गुजरते वख्त की अहमीयत समझो,
अगर जवानी युँ ही नीँन्द मे सोते हुवे गुजारोगे तो बुढापा रोते हुवे गुजारना पड सकता है।
पर हकीकत तो ये है के जीँदगी का एक और साल कम हो गया,
एक और साल आयेगा और वो भी युहीँ ना गुजर जाये इसीलीये पैसे से ज्यादा इमान पर तवज्जो दो, इमान मजबुत होगा तो आपसी रीश्ते मजबुत होँगे,
और आपसी रीश्ते मजबुत होँगे तो कौम ताखतवर होगी।
और कौम ताखतवर होगी तो हर एक परेशानी दुर हो जायेगी।
गया सो वक्त नही आता।
इसीलीये इमान को मजबुत करो।
जो वक्ता जाया गया उस पर अफसोस करो।
और गुजरते वख्त की अहमीयत समझो,
अगर जवानी युँ ही नीँन्द मे सोते हुवे गुजारोगे तो बुढापा रोते हुवे गुजारना पड सकता है।